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World Breastfeeding Week 2019

विश्व स्तनपान सप्ताह सारे विश्व में स्तनपान प्रोत्साहन और दुनिया के शिशुओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है।

स्तनपान एक सार्वभौमिक समाधान है, जो कि हर व्यक्ति को जीवन में पर्याप्त शुरुआत देता है। यह समस्त विश्व की महिलाओं और शिशुओं के स्वास्थ्य, आरोग्यता और उत्तरजीविता में बढ़ोतरी करता है। ‘स्तनपान’ असमानता, संकट और गरीबी से भरे संसार में शिशुओं और माताओं के लिए जीवन भर बेहतर स्वास्थ्य का आधार है।

विश्व स्तनपान सप्ताह, वर्ष 2019 (डब्ल्यूबीडब्ल्यू) का विषय स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए माता-पिता को सशक्त बनाएं’ हैं।

डब्ल्यूबीडब्ल्यू का आयोजन विश्व स्तनपान कार्रवाई गठबंधन (डब्ल्यूएबीए) द्वारा किया जाता है, जो कि विश्व में डब्लूएचओ/यूनिसेफ (विश्व स्वास्थ्य संगठन/संयुक्त राष्ट्र बाल निधि) के समन्वय में स्तनपान संरक्षण, संवर्धन और सहयोग से संबंधित वैश्विक नेटवर्क है।

यह विषय माता-पिता दोनों को स्तनपान कराने के लक्ष्यों को साकार करने के लिए सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

सशक्तीकरण की प्रक्रिया में सहयोगात्मक वातावरण बनाने के लिए प्रमाण-आधारित निष्पक्ष जानकारी और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है जहां माताएं बेहतर तरीकें से स्तनपान करा सकती हैं। स्तनपान माता के अधिकार क्षेत्र में है और यदि पिता, सहभागी (जीवन साथी), परिवार, कार्यस्थल, और समुदाय उसे सहयोग करते हैं, तो स्तनपान में बढ़ोतरी होती है।

मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम प्राकृतिक आहार है। ये वे सभी ऊर्जावान और पोषक तत्व प्रदान करता है जिनकी आवश्यकता शिशु को जीवन के प्रथम माह में होती है। छह माह की अवस्था के बाद से एक वर्ष तक मां का दूध शिशु की आवश्यकता को आधा पूरा कर पाता है तथा दूसरे वर्ष के दौरान शिशु के पोषण की एक तिहाई आवश्यकता ही पूरी हो पाती है। स्‍तनपान एक स्‍वाभाविक प्रक्रिया है, इसे व्यवहार में सीखा भी जाता है। माताओं और अन्य देखभालकर्त्ताओं को सर्वोत्तम स्तनपान (जीवन के प्रथम छह महीनों तक केवल स्तनपान और दो वर्ष या उससे अधिक उम्र तक-उपयुक्त, पर्याप्त पौष्टिक और सुरक्षित अनुपूरक खाद्य पदार्थों के साथ जारी रखना चाहिए) की स्थापना और रखरखाव के लिए सक्रिय सहयोग की आवश्यकता होती है।

सर्वोत्तम स्तनपान (मां का दूध)’ शिशु के संपूर्ण जीवन पर सकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव डालता है, जो कि इस प्रकार है:

बच्चा:

• संक्रामक रोगों से बचाव;

• डायरिया/दस्त की व्यापकता और गंभीरता में कटौती;

• एक्यूट ओटिटिस मीडिया और श्वसन संक्रमण में कमी;

• दंत क्षय और दांतों की अपूर्ण स्थिति की रोकथाम;

• अधिक बुद्धिमान बनाना;

• मजबूत और विशेष संबंध की स्थापना;

मां

• मातृ स्वास्थ्य लाभ में तीव्रता और प्रसवोत्तर वज़न में कटौती;

• जन्म के अंतर को बनाए रखने में सहायक;

• स्तन और डिम्बग्रंथि कैंसर के ज़ोखिम में कमी;

• मातृ प्रसवोत्तर अवसाद में कटौती;

• उच्च रक्तचाप के ज़ोखिम में कमी;

डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ की अनुशंसा:

• जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने की शुरुआत की जानी चाहिए।

• छह महीने की अवस्था तक केवल स्तनपान (शिशु को बिना किसी अतिरिक्त आहार या पेय, यहां तक कि पानी भी नहीं दिया जाना चाहिए, जब तक कि चिकित्सा कारण न हों, केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए) कराया जाना चाहिए।

• बच्चे की मांग पर स्तनपान- बच्चे को दिन या रात में उसकी भूख के आधार पर स्तनपान कराया जाना चाहिए।

• बोतल, निप्पल या चुसनी का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

• छह महीने के बाद पर्याप्त पौष्टिक और सुरक्षित अनुपूरक (ठोस) खाद्य पदार्थों के साथ दो वर्ष या उससे अधिक तक स्तनपान कराया जाना चाहिए।

स्तनपान के बारे में तथ्य:

• वैश्विक स्तर पर 0-6 महीने की अवस्था के केवल 38% शिशु ही स्तनपान करते हैं।

• स्तनपान कराने की शीघ्र शुरुआती (पहले घंटे के भीतर) बीस प्रतिशत नवजात मृत्यु को रोकती है।

• जन्म के बाद के पहले कुछ दिनों में स्तनपान कराने वाली मां कोलोस्ट्रम नामक आहार उत्पन्न करती है। शिशु के लिए कोलोस्ट्रम का सेवन बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे नवजात शिशु मृत्यु और जन्म के अट्ठाई दिनों तक होने वाली मृत्यु में कमी आती है। हालांकि, पारंपरिक संस्कृतियों के कारण कई संस्कृतियों में कोलोस्ट्रम को फेंक दिया जाता है।

• जिन शिशुओं को प्रथम छह महीने तक पूर्ण स्तनपान कराया जाता हैं, उनकी डायरिया/दस्त से मरने की संभावना ग्यारह बार कम होती है तथा निमोनिया से मरने की संभावना पंद्रह गुना कम होती है।

• स्तनपान बेहद किफ़ायती है।

भारत में राष्ट्रीय स्तनपान संवर्धन कार्यक्रम

भारत में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण वर्ष 2015-2016 (एनएफएचएस -4) दर्शाता है, कि केवल 42.6% मां जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराना शुरू करती हैं, हालांकि 78.9% प्रसव स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में होते है। इसके अलावा जीवन के पहले छह महीनों के दौरान 54.9% बच्चों को विशेष रूप से स्तनपान कराया गया था। नवजात और शिशु स्वास्थ्य में स्तनपान को बढ़ावा देने के प्रयासों को तेज़ करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने 'प्रजनन, मातृ, नवजात शिशु, बाल और किशोरावस्था स्वास्थ्य (आरएमएनसीएच + ए)’, के तहत राष्‍ट्रीय स्‍तर पर ‘एमएए (मां का पूर्ण स्‍नेह) कार्यक्रम आरंभ किया है। 

एमएए-मां का पूर्ण स्‍नेह’: देश में स्तनपान और शिशु पोषण पद्धति (शिशु आहार (स्तनपान) अभ्यास) को बढ़ावा देने के लिए अगस्त वर्ष 2016 में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम 'एमएए' (माताओं का पूर्ण स्नेह) का कार्यान्वयन किया गया है। इसमें स्तनपान के संरक्षण, संवर्धन और सहयोग तथा स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों एवं समुदाय के स्तर पर शिशु पोषण पद्धति (शिशु आहार (स्तनपान) अभ्यास) की गतिविधियों का एक व्यापक समूह शामिल है। एमएए कार्यक्रम के प्रमुख घटकों में सामुदायिक जागरूकता निर्माण, आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से पारस्परिक व्यक्तिगत संवाद को मज़बूत करना, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में प्रसव के बिंदुओं पर स्तनपान कराने के लिए कौशल सहयोग और निगरानी एवं मान्यता/पुरस्कार शामिल है।

‘एमएए-मां का पूर्ण स्‍नेह’ के बारे में अधिक जानकारी जानने के लिए nhm.gov.in/MAA/ पर जाएं।

सर्वोत्तम स्तनपान के दस चरणों के बारे में जानकारी जानने के लिए who.int/ पर क्लिक करें। 

https://www.nhp.gov.in/world-breastfeeding-week-2018_pg

संबंधित लिंक्स- विश्व स्तनपान सप्ताह, वर्ष 2018

संदर्भ:

.who.int/nutrition/topics/exclusive_breastfeeding/en/

https://worldbreastfeedingweek.org/

www.who.int/features/factfiles/breastfeeding/en/#

www.unicef.org/nutrition/files/Scientific_rationale_

www.who.int/en/news-room/fact-sheets/detail/infant-